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प्रेमचंद का आदर्शोंमुख यथार्थवाद

साहित्य में यथार्थवादी परंपरा की आधारशिला रखने वाले मुंशी प्रेमचंद बेहद ईमानदार कलमकार थे। ईमान की कलम में बहुत पैनी धार होती है जो उनके साहित्य में दृष्टव्य है।  यद्यपि प्रारंभिक रचनाओं में प्रेमचंद की लेखनी, कल्पना और रूमानियत के रंगों से जीवन-प्रसंगों को जीवंत करते रही तथापि समय की धारा के साथ उनके जीवन-संघर्षों…

आज़ादी के बाद हिंदी का विकास

भूमंडलीकरण के दौर में हिंदी सहज रूप से विकसित हो रही है। विभिन्न भाषाओं के शब्दों को आत्मसात् कर और सशक्त हो रही है यानी हमारा  दिल तो हिंदुस्तानी है पर जूता जापानी, पतलून इंग्लिस्तानी और टोपी रूसी हो गई है। गोपाल सिंह नेपाली जी के शब्दों में – “हिंदी जन मन की गंगा है…


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