प्रेमचंद का आदर्शोंमुख यथार्थवाद

साहित्य में यथार्थवादी परंपरा की आधारशिला रखने वाले मुंशी प्रेमचंद बेहद ईमानदार कलमकार थे। ईमान की कलम में बहुत पैनी धार होती है जो उनके साहित्य में दृष्टव्य है।  यद्यपि प्रारंभिक रचनाओं में प्रेमचंद की लेखनी, कल्पना और रूमानियत के रंगों से जीवन-प्रसंगों को जीवंत करते रही तथापि समय की धारा के साथ उनके जीवन-संघर्षोंContinue reading “प्रेमचंद का आदर्शोंमुख यथार्थवाद”

आज़ादी के बाद हिंदी का विकास

भूमंडलीकरण के दौर में हिंदी सहज रूप से विकसित हो रही है। विभिन्न भाषाओं के शब्दों को आत्मसात् कर और सशक्त हो रही है यानी हमारा  दिल तो हिंदुस्तानी है पर जूता जापानी, पतलून इंग्लिस्तानी और टोपी रूसी हो गई है। गोपाल सिंह नेपाली जी के शब्दों में – “हिंदी जन मन की गंगा हैContinue reading “आज़ादी के बाद हिंदी का विकास”

विशेष रिपोर्ट

सामान्य समाचारों से अलग वे विशेष समाचार जो गहरी छान-बीन, विश्लेषण और व्याख्या के आधार पर प्रकाशित किये जाते हैं, विशेष रिपोर्ट कहलाते हैं ।  विशेष रिपोर्ट के प्रकार: (1) खोजी रिपोर्ट : इसमें अनुपल्ब्ध तथ्यों को गहरी छान-बीन  कर सार्वजनिक किया जाता है। (2) इन्डेप्थ रिपोर्ट:  सार्वजानिक रूप से प्राप्त तथ्यों की गहरी छान-बीनContinue reading “विशेष रिपोर्ट”

पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया

1. वह सामान्य जनता के लिए लिख रहा है, इसलिए उसकी  भाषा सरल व रोचक होनी चाहिए। 2. वाक्य छोटे व सहज हों। कठिन भाषा का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। 3. भाषा को प्रभावी बनाने के लिए  अनावश्यक विशेषणों, जार्गन्स(अप्रचलित शब्दावली) और क्लीशे (पिष्टोक्ति, दोहराव) का प्रयोग नहीं होना चहिए। पत्रकार के प्रकार-— पत्रकारContinue reading “पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया”

अभिव्यक्ति और माध्यम

अभिव्यक्ति और माध्यम 1.संचार: 2 .जनसंचार:  प्रत्यक्ष संवाद के बजाय किसी तकनीकी या यान्त्रिक माध्यम के द्वारा समाज के एक विशाल वर्ग से संवाद कायम करना जनसंचार कहलाता है। 3. जनसंचार के माध्यम:   अखबार, रेडियो, टीवी, इंटरनेट, सिनेमा आदि. 4 . जनसंचार की विशेषताएँ: 5. जनसंचार के प्रमुख कार्य:  6 . पत्रकारिता: 7 . समाचार:Continue reading “अभिव्यक्ति और माध्यम”

लेखन कौशल में सुधार

वैश्विक स्तर पर बदलते भाषायी परिवेश के साथ-साथ विद्यालयी शिक्षा में भी हिंदी-शिक्षण प्रक्रिया में व्यावहारिक परिवर्तन की दरकार होना स्वाभाविक है| आज हमारा विद्यार्थी कमोवेश किसी विषयवस्तु पर अधिकतर ‘हिंग्लिश’ में अभिव्यक्ति कर पाता है साथ ही लेखन में भी सुधार की बहुत गुंजाइश रहती है | ‘ठीकरा दूसरे के सिर पर फोड़ने’ कीContinue reading “लेखन कौशल में सुधार”

हिंदी व्याकरण : पद -परिचय

पद-परिचय सबसे पहले ‘शब्द’ और ‘पद’ में अन्तर की लेना आवश्य है- ‘शब्द’ स्वतंत्र इकाई है। जब कोई शब्द ही वाक्य में प्रयुक्त होता है, तो पद कहलाता है। जैसे:- ‘लड़का’। यहाँ ‘लड़का’ एक स्वतंत्र शब्द है। लड़का घर जाता है। यहाँ ‘लड़का’ शब्द पद है। पद-परिचय:- वाक्य में प्रयुक्त पदों का विस्तृत व्याकरणिक परिचयContinue reading “हिंदी व्याकरण : पद -परिचय”

सीबीएसई परीक्षा कक्षा दसवीं के लिए उपयोगी पाठ्य-सामग्री : रचना के आधार पर वाक्य-भेद

वाक्य किसे कहते हैं ? -मनुष्य के विचारों की पूर्णता से प्रकट करने वाला पद-समूह, जो व्यवस्थित हो, वाक्य कहलाता है। वाक्य सार्थक शब्दों का व्यवस्थित रूप है। वाक्य में – आकांक्षा, योग्यता और आसक्ति का होना आवश्यक है। 1.आंकाक्षा – वाक्य के एक पद को सुनकर दूसरे पद को सुनने या जानने की जोContinue reading “सीबीएसई परीक्षा कक्षा दसवीं के लिए उपयोगी पाठ्य-सामग्री : रचना के आधार पर वाक्य-भेद”

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