वाक्य किसे कहते हैं ?
-मनुष्य के विचारों की पूर्णता से प्रकट करने वाला पद-समूह, जो व्यवस्थित हो, वाक्य कहलाता है। वाक्य सार्थक शब्दों का व्यवस्थित रूप है।
वाक्य में – आकांक्षा, योग्यता और आसक्ति का होना आवश्यक है।
1.आंकाक्षा – वाक्य के एक पद को सुनकर दूसरे पद को सुनने या जानने की जो स्वाभाविक उत्कण्ठा जागती है, उसे आकांक्षा कहते हैं; जैसे- दिन में काम करते हैं।
इस वाक्य को सुनकर हम प्रश्न करते हें- ‘कौन लोग काम करते हैं?’ यदि हम कहें कि ‘दिन में सभी काम करते हैं, तो ‘सभी’ कह देने से प्रश्न का उत्तर मिल जाता है और वाक्य ठीक हो जाता है। अत: इस वाक्य में ‘सभी’ शब्द की आकांक्षा थी जिसकी पूर्ति से वाक्य पूरा हो गया।
2. योग्यता – योग्यता से तात्पर्य है – पदों के अर्थबोधन की सामर्थ्य;
जैसे – किसान लाठी से खेत जोतता है।
इस वाक्य में ‘लाठी’ के स्थान पर ‘हल’ का प्रयोग होना चाहिए क्योंकि ‘हल’ खेत जोतने के प्रसंग में अर्थबोधन की क्षमता सामथ्र्य रखता है।
3. संनिधि (आसक्ति)- वाक्य के शब्दों (पदों) को बोलने या लिखने में निकटता होना आवश्यक है। रूक-रूककर बोले गए शब्द या लिखते समय ठहराव दिखाने के लिए विराम चिह्नों का प्रयोग न करने से अर्थ में बाधा पड़ती है। इस प्रकार अर्थ तभी निकलता है, जब अंश (शब्द) समुचित समय सीमा में ही बोले जाएँ। इस शर्त को संनिधि (आसक्ति) कहते हैं।
वाक्य के घटक:-
वाक्य के मूल और अनिवार्य घटक हैं – 1. कर्ता 2. क्रिया।
इनके अतिरिक्त वाक्य के अन्य घटक भी होते हैं, विशेषण, क्रिया-विशेषण, कारक आदि, इन्हें ऐच्छिक घटक कहा जाता है।
कर्ता और क्रिया के अनुसार वाक्य को दो भागों में विभाजित किया जाता है – 1. उद्देश्य 2. विधेय
1. उद्देश्य – जिसके विषय में कुछ कहा जाए। (1. कर्ता 2. कर्ता का विस्तार)
2. विधेय – उद्देश्य के विषय में जो कुछ कहा जाए। (1. क्रिया 2. क्रिया का पूरक, 3. कर्म / पूरक 4. कर्म / पूरक का विस्तार 5. अन्य कारकीय पद और उनका विस्तार)
उद्देश्य और विधेय को इस प्रकार समझा जा सकता है-
उदाहरण- इस समय रवि की माँ धारधार चाकू से पके-पके फल धीरे-धीरे काट रही है ।

रचना की दृष्टि से वाक्य-भेद-
रचना की दृष्टि से वाक्य के तीन प्रकार है –
1. सरल या साधारण वाक्य
2. संयुक्त वाक्य
3. मिश्र या जटिल वाक्य
1. सरल या साधारण वाक्य – इसमें एक या एक से अधिक उद्देश्य और एक विधेय होते हैं अथवा जिस वाक्य मे एक ही मुख्य क्रिया हो, उसे सरल या साधारण वाक्य कहते हैं। जैसे –
1. वह जोर-जोर से रोया।
2. मैं और मेरा भाई दिल्ली जाएँगे।
3. वे हर दिन दूध पीते हैं।
4. मोहन घर जा रहा होगा।
5. वह अत्याचार किए जा रहा था।
उक्त वाक्यों में रेखांकित क्रियाएँ मुख्य क्रियाएँ हैं।
ध्यान दें – स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त होने वाला उपवाक्य ही सरल वाक्य होता है।
2. संयुक्त वाक्य – दो या दो से अधिक समान स्तरीय (समानाधिकरण) उपवाक्य किसी समानाधिकरण समुच्चयाबोधक अव्यय से जुड़े होते हैं, वे संयुक्त वाक्य कहलाते हैं। जैसे –
1. हम लोग पुणे घूमने गए और वहाँ चार दिन रहे।
2. यहाँ आप रह सकते हैं या आपका भाई रह सकता है।
3. वे बीमार हैं, अत: आने में असमर्थ हैं।
ध्यान दें – 1. समानाधिकरण उपवाक्य आश्रित न होकर एक-दूसरे के पूरक होते हैं।
2. इन उपवाक्यों का स्वतंत्र रूप से भी प्रयोग हो सकता है।
नोट: जिन समुच्चयबोधक शब्दों के द्वारा दो समान वाक्यांशों पदों और वाक्यों को परस्पर जोड़ा जाता है, उन्हें समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं।
जैसे- 1.सुनंदा खड़ी थी और अलका बैठी थी।
इस वाक्य में ‘और’ समुच्चयबोधक शब्द द्वारा दो समान वाक्य परस्पर जुड़े हैं।
समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय स के भेद- समानाधिकरण समुच्चयबोधक चार प्रकार के होते हैं-
(क) संयोजक- जो शब्दों, वाक्यांशों और उपवाक्यों को परस्पर जोड़ने वाले शब्द संयोजक कहलाते हैं; जैसे-और, तथा, एवं, व आदि संयोजक शब्द हैं।
(ख) विभाजक- शब्दों, वाक्यांशों और उपवाक्यों में परस्पर विभाजन और विकल्प प्रकट करने वाले शब्द विभाजक या विकल्पक कहलाते हैं।जैसे-या, चाहे अथवा, अन्यथा आदि।
(ग) विरोधसूचक- दो परस्पर विरोधी कथनों और उपवाक्यों को जोड़ने वाले शब्द विरोधसूचक कहलाते हैं; जैसे-परन्तु,पर, किन्तु, मगर, बल्कि, लेकिन आदि।
(घ) परिणामसूचक-दो उपवाक्यों को परस्पर जोड़कर परिणाम को दर्शाने वाले शब्द परिणामसूचक कहलाते हैं; जैसे-फलतः, परिणामस्वरूप, इसलिए, अतः, अतएव, फलस्वरूप, अन्यथा आदि।
3. मिश्र वाक्य – मिश्र वाक्य में एक उपवाक्य स्वतंत्र (प्रधान) होता है और एक या एक से अधिक आश्रित उपवाक्य होते हैं। मिश्र वाक्य के उपवाक्य व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय से जुड़े होते हैं।
जैसे – मैंने देखा कि बाजार में चहल-पहल है।
इस वाक्य में दो उपवाक्य है : 2. मैंने देखा, 2. बाजार में पहल-पहल थी। ये दोनों उपवाक्य ‘कि’ व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय से जुड़े हैं। इनमें –
मुख्य या प्रधान उपवाक्य है – मैंने देखा।
आश्रित उपवाक्य है – बाजार में चहल-पहल हैं।
(मिश्र वाक्य के उपवाक्य प्राय: कि, जो, जब, जहाँ, जिसने, ज्योंही-त्योंही, जिधर-उधर, जैसे-वैसे, जितना-उतना, क्योंकि, यदि-तो, ताकि, यद्यपि-तथापि, अर्थात्, मानो आदि व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय से जुड़े होते हैं।)
नोट: किसी वाक्य के प्रधान और आश्रित उपवाक्यों को परस्पर जोड़ने वाले शब्द व्यधिकरण समुच्चयबोधक कहलाते हैं।
व्यधिकरण समुच्चयबोधक के भेद- व्यधिकरण समुच्चयबोधक चार प्रकार के होते हैं-
(क) कारणसूचक- दो उपवाक्यों को परस्पर जोड़कर होने वाले कार्य का कारण स्पष्ट करने वाले शब्दों को कारण सूचक कहते हैं। जैसे- कि, क्योंकि, इसलिए, चूँकि, ताकि आदि।
(ख) संकेत सूचक-जो दो योजक शब्द दो उपवाक्यों को जोड़ने का कार्य करते हैं, उन्हें संकेतसूचक कहते हैं।
जैसे- यदि….तो, यद्यपि….तथापि(फिर भी)आदि।
(ग) उदेश्य सूचक- दो उपवाक्यों को परस्पर जोड़कर उनका उद्देश्य स्पष्ट करने वाले शब्द उद्देश्य सूचक कहलाते हैं। जैसे- इसलिए कि, जिससे कि आदि।
(घ) स्वरूप सूचक- मुख्य उपवाक्य का अर्थ स्पष्ट करने वाले शब्द स्वरूपसूचक कहलाते हैं। जैसे- यानी, मानो, अर्थात् आदि।
प्रधान व आश्रित उपवाक्य की पहचान –
1. प्रधान उपवाक्य वह होता है जिसकी क्रिया मुख्य होती है।
2. मिश्र वाक्य की मुख्य क्रिया जानने के लिए एक सरल वाक्य में रूपांतरित करते हैं। जो क्रिया वाक्यांत में (समापिका) होगी, वही उपवाक्य प्रधान होगा। रूपांतरित होने वाली क्रिया वाला उपवाक्य आश्रित होगा। जैसे-
‘तुम परिश्रम करते तो अवश्य सफल होते।’
सरल वाक्य में रूपांतरण – ‘तुम परिश्रम करने पर अवश्य सफल होते।’ स्पष्ट है – यहाँ ‘परिश्रम करते’ क्रिया रूपांतरित हो गई है, अत: ‘तुम परिश्रम करते’ आश्रित उपवाक्य है। दूसरी ओर, ‘सफल होते’ क्रिया अपरिवर्तित है और वाक्यांत में ही है; अत: प्रधान उपवाक्य है – ‘अवश्य सफल होते।’
मिश्र उपवाक्य में आने वाले आश्रित उपवाक्य के भेद –
ये आश्रित (गौण) उपवाक्य तीन प्रकार के होते हैं-
(क) संज्ञा उपवाक्य
(ख) विशेषण उपवाक्य
(ग) क्रिया विशेषण उपवाक्य
(क) संज्ञा उपवाक्य – प्रधान उपवाक्य की किसी संज्ञा या संज्ञा पदबंध के स्थान पर आने वाला उपवाक्य संज्ञा उपवाक्य कहलाता है।
जैसे – गुरूजी ने कहा कि आज पुस्तक पढ़ाएँगे।
पहचान – यहाँ ‘आज पुस्तक पढ़ाएँगे’ उपवाक्य ‘गुरूजी ने कहा’ उपवाक्य के कर्म के रूप में प्रयुक्त हुआ है। सामान्यत: मुख्य उपवाक्य पर ‘क्या’ प्रश्न करने से जो उत्तर आता है, वही संज्ञा उपवाक्य होता है।
उक्त वाक्य में – गुरूजी ने क्या कहा? उत्तर मिलेगा – ‘आज पुस्तक पढ़ाएँगे’ यही संज्ञा उपवाक्य हैं। ये प्राय: ‘कि’ से आरम्भ होते हैं।
संज्ञा उपवाक्य के अन्य उदाहरण –
1. सचिन बोला कि मैं मुम्बई जा रहा हूँ। (‘बोला’ – क्रिया का कर्म)
2. जान पड़ता है कि पिताजी कुछ बीमार हैं। (‘जान पड़ता है’- क्रिया का उद्देश्य)
3. इनसे पूछिए कि ये कौन हैं? (‘यह’ का पूरक)
4. मुझे विश्वास है कि वे आज अवश्य आएँगे। (‘विश्वास’ का समानाधिकरण)
यहाँ रेखांकित उपवाक्य संज्ञा (आश्रित) उपवाक्य है, शेष प्रधान उपवाक्य है।
(ख) विशेषण उपवाक्य – मुख्य (प्रधान) उपवाक्य के किसी संज्ञा सर्वनाम शब्द की विशेषता बताने वाला उपवाक्य विशेषण उपवाक्य कहलाता है।
जैसे – 1. जो दूसरों की निंदा करते हैं, वे लोग अच्छे नहीं होते।
2. वह किताब कहाँ है, जो आप कल लाए थे?
3. यह यही बालक है, जिसे मैने कल शहर में देखा था।
पहचान – मुख्य उपवाक्य पर ‘कौन’, ‘किसे’, ‘किन्हें’ प्रश्न करने पर जो उत्तर आता है, वही विशेषण उपवाक्य होता है। यह प्राय: ‘जो’ अथवा इसके किसी रूप (जिसे, जिसने, जिसका, जिन्हें, जिनके लिए आदि) से आरम्भ होता है और वाक्य के प्रारम्भ, मध्य या अंत में कहीं भी आ सकता है।
(ग) क्रिया विशेषण उपवाक्य – मुख्य (प्रधान) उपवाक्य की क्रिया के संबंध में किसी प्रकार की सूचना देने वाला उपवाक्य क्रिया-उपवाक्य क्रिया-विशेषण उपवाक्य कहलाता है। जैसे –
1. तुम वहाँ चले जाओ, जहाँ बस खड़ी है।
2. जहाँ-जहाँ हम गए, हमारा स्वागत हुआ।
यहाँ रेखांकित उपवाक्य क्रिया विशेषण आश्रित उपवाक्य हैं।
क्रिया-विशेषण उपवाक्य पाँच प्रकार के होते हैं –
(क) कालवाची उपवाक्य –
1. ज्योंही मैं स्टेशन पहुँचा, गाड़ी ने सीटी बजा दी।
2. जब मैं घर पहुँचा तो वर्षा हो रही थी।
(ख) स्थानवाची उपवाक्य –
1. जहाँ तुम पढ़ते थे, मेरा भाई भी वहीं पढ़ता था।
2. तुम जिधर जा रहे हो, उधर आगे रास्ता बंद है।
3. वहाँ इस वर्ष अकाल पड़ सकता है, जहाँ वर्षा नहीं हुई।
(ग) रीतिवाची उपवाक्य –
1. आपको वैसा ही करना है, जैसा मैं कहता हूँ।
2. वह उसी तरह खेलेगा, जैसा उसने सीखा है।
(घ) परिमाणवाची उपवाक्य –
1. जितना तुम पढ़ोगे, उतना समझ आएगा।
2. वह उतना ही थकेगा, जितना अधिक दौड़ेगा।
3. जैसे-जैसे आमदनी बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे आवश्यकताएँ बढ़ती जाती हैं।
(ड़) परिणाम (कार्य-कारण) वाची उपवाक्य –
1. वह आएगा जरूर क्योंकि उसको नौकरी की जरूरत है।
2. यदि वह आएगा तो काम बन जाएगा।
3. यद्यपि तू पहलवान है, तथापि (फिर भी) मुझसे नहीं जीत सकता।
वाक्य रूपांतरण-
1. सरल वाक्य – मोहन हिन्दी पढ़ने के लिए शास्त्री जी के यहाँ गया है।
संयुक्त वाक्य – मोहन को हिन्दी पढ़ना है और वह शास्त्री जी के यहाँ गया है।
या
संयुक्त वाक्य – मोहन को हिन्दी पढ़ना है अत: वह शास्त्री जी के यहाँ गया है।
मिश्र वाक्य – मोहन शास्त्री जी के यहाँ गया है, क्योंकि उसे हिन्दी पढ़ना है।
2. सरल वाक्य – मोहन बहुत खिलाड़ी होने पर भी कभी अनुत्तीर्ण नहीं होता।
संयुक्त वाक्य – मोहन बहुत खिलाड़ी है, किन्तु कभी अनुत्तीर्ण नहीं होता।
मिश्र वाक्य – यद्यपि मोहन बहुत खिलाड़ी है फिर भी कभी अनुत्तीर्ण नहीं होता।
3. सरल वाक्य – गड्ढा खोदकर मजदूर चले गए।
संयुक्त वाक्य – मजदूरों ने गड्ढा खोदा और चले गए।
मिश्र वाक्य – जब मजदूरों ने गड्ढा खोद लिया तब चले गए।
अभ्यास प्रश्न-
(क) रचना के आधार पर वाक्य भेद लिखिए।
1. सीमा यहाँ आई और रेखा बाहर गई।
2. रेखा ज्योंही घर पहुँची, वर्षा शुरू हो गई।
3. मैंने खाना नहीं खाया, इसलिए फल नहीं खाया।
4. कल मुझे दिल्ली जाना है और फिर कलकत्ता।
5. वह पुस्तक खरीदने के लिए दुकान पर गया।
6. वह बाजार गया और फल खरीदकर लाया।
7. उस बालक को बुलाओ, जिसने गिलास तोड़ा है।
8. गीता नृत्य कर रही है।
9. गुरूजी ने कहा कि कल छुट्टी रहेगी।
(ख) रेखांकित उपवाक्य का प्रकार बताइए –
(क) जब आपका आदमी आया, मैं नहा रहा था।
(ख) जैसा वह गाती है, कोई नहीं गा सकता।
(ग) तुम जितना जानते हो, उतना काम करो।
(घ) यदि मेरी बात मानागे तो सुखी रहोगी।
(ङ) जो सदा सत्य बोलता है, उसी की जीत होती है।
(च) यह भ्रम है कि वह अमीर है।
(छ) रमा ने आपकी निंदा की, यह कहना सर्वथा गलत है।
(ग) निर्देशानुसार वाक्य रचनांतरण कीजिए-
1. वे वहाँ जाकर भाषण देंगे। (संयुक्त वाक्य में)
2. मेरा एक बहुत अच्छा मित्र विदेश चला गया ।(मिश्र वाक्य में)
3. गली में शोर होने पर लोग घरों से बाहर आने लगे ।(संयुक्त वाक्य में)
4. वे यहाँ से जाकर भाषण देने लगे।(मिश्र वाक्य में)
5. (अ) अचानक पुलिस आ गई (आ) गली में सन्नाटा छा गया (संयुक्त वाक्य में )
6. रवि ने कपड़े पहने, पर वह संतुष्ट नहीं है। (मिश्र वाक्य में )
7. छात्र परिश्रम करते हैं और जीवन में सफल होते हैं ।(सरल वाक्य में)
8. माताजी ने आटा गूँधकर रोटी बनाई। (संयुक्त वाक्य में )
(घ) नीचे लिखे वाक्यों में कुछ साधारण वाक्य, कुछ मिश्रित वाक्य और कुछ संयुक्त वाक्य हैं। सामने कोष्ठकों में उनका ठीक-ठीक नाम लिखिए।
1. जो विद्वान होता है, उसे सभी आदर देते हैं। (……….)
2. मैं चाहता हूँ कि तुम परिश्रम करो। (……….)
3. वह आदमी पागल हो गया है। (……….)
4. जब राजा नगर में आया, तब उत्सव मनाया गया। (……….)
5. अपना काम देखो या शांत बैठे रहो। (……….)
6. जो पत्र मिला है, उसे शीला ने लिखा होगा। (……….)
7. आस्ट्रेलिया से आए हुए खिलाडिय़ों को प्रथम तल पर ठहराया गया है। (……….)
8. मैं उसके पास जा रहा हूँ, ताकि कुछ योजना बन सके। (……….)
9. आपकी वह कुर्सी कहाँ है, जो आप कलकत्ता से लाए थे। (……….)
10. हमारे मित्र कल यहाँ से जाएँगे और आगरा पहुँचकर ताजमहल देखेंगे। (……….)