- पत्रकारीय लेखन– पत्रकारीय लेखन का संबंध समसामयिक विषयों, विचारों व घटनाओं से है। समाचार माध्यमों मे काम करने वाले पत्रकार अपने पाठकों तथा श्रोताओं तक सूचनाएँ पहुँचाने के लिए लेखन के विभिन्न रूपों जैसे- सम्पादकीय, समाचार , आलेख, रिपोर्ट, फ़ीचर, स्तम्भ तथा कार्टून आदि का इस्तेमाल करते हैं, इसे ही पत्रकारीय लेखन कहते हैं।
- पत्रकारीय लेखन का प्रमुख उद्देश्य है– सूचना देना, शिक्षित करना तथा मनोरंजन आदि करना।
- पत्रकार को लिखते समय यह ध्यान रखना चाहिए
1. वह सामान्य जनता के लिए लिख रहा है, इसलिए उसकी भाषा सरल व रोचक होनी चाहिए।
2. वाक्य छोटे व सहज हों। कठिन भाषा का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
3. भाषा को प्रभावी बनाने के लिए अनावश्यक विशेषणों, जार्गन्स(अप्रचलित शब्दावली) और क्लीशे (पिष्टोक्ति, दोहराव) का प्रयोग नहीं होना चहिए।
पत्रकार के प्रकार-— पत्रकार तीन प्रकार के होते हैं –
1. पूर्ण कालिक 2. अंशकालिक (स्ट्रिंगर) 3. फ़्रीलांसर या स्वतंत्र पत्रकार|
. समाचार–
- उत्तर- जन महत्त्व की ताजा घटना, विचार या समस्या की रिपोर्ट है,
- इसमें अधिक से अधिक लोगों की रुचि होती है और जिसका अधिक से अधिक लोगों पर प्रभाव पड़ता हो।
समाचार लेखन—
समाचार लेखन की शैली के प्रकार
- 1. उर्ध्वस्तूपी / सीधा पिरामिड शैली –
2. विलोम स्तूपी / उलटा पिरामिड शैली – उल्टा पिरामिड शैली एक लेखन शैली है जिसकी मदद से खबरें बुनी जाती है। इसे अंग्रेजी में इन्वर्टेड पिरामिड मैथड कहा जाता है।
विशेषता: –
- इस शैली में सबसे पहले समाचार का महत्त्वपूर्ण तथ्य लिखा जाता है।
- उसके बाद घटते हुए अन्य तथ्यों एवं सूचनाओं को लिखा जाता है।
- उलटा पिरामिड शैली में कहानी का क्लाइमेक्स अंत में नहीं , बल्कि खबर के प्रारम्भ में आ जाता है।
समाचार उलटा पिरामिड शैली में लिखे जाते हैं, यह समाचार लेखन की सबसे उपयोगी और लोकप्रिय शैली है। इस शैली का विकास अमेरिका में गृह यद्ध के दौरान हुआ। इसमें महत्त्वपूर्ण घटना का वर्णन पहले प्रस्तुत किया जाता है, उसके बाद महत्त्व की दृष्टि से घटते क्रम में घटनाओं को प्रस्तुत कर समाचार का अंत किया जाता है। समाचार में इंट्रो, बॉडी और समापन के क्रम में घटनाएँ प्रस्तुत की जाती हैं ।
उलटा पिरामिड शैली के भाग : –
इस शैली के तीन हिस्से होते हैं जो इस प्रकार है – (1) इंट्रो या लीड इसे हिंदी में मुखड़ा कहा जाता है। (2) बॉडी इसमें समाचार के विस्तृत ब्योरे को घटते हुए क्रम में लिखा जाता है। और (3) समापन होता है।
- समाचार के छह ककार– समाचार लिखते समय मुख्य रूप से छह प्रश्नों- क्या, कौन, कहाँ, कब , क्यों और कैसे का उत्तर देने की कोशिश की जाती है। इन्हें समाचार के छ: ककार कहा जाता है। प्रथम चार (क्या, कौन, कहाँ, कब) प्रश्नों के उत्तर इंट्रो में तथा अन्य दो ( क्यों और कैसे) के उत्तर समापन से पूर्व बॉडी वाले भाग में दिए जाते हैं ।
- फ़ीचर:
- फ़ीचर एक सुव्यवस्थित, सृजनात्मक और आत्मनिष्ठ लेखन है ।
- फ़ीचर लेखन का उद्देश्य: फ़ीचर का उद्देश्य मुख्य रूप से पाठकों को सूचना देना, शिक्षित करना तथा उनका मनोरंजन करना होता है।
- फ़ीचर और समाचार में अंतर:
- समाचार में रिपोर्टर को अपने विचारों को डालने की स्वतंत्रता नहीं होती, जबकि फ़ीचर में लेखक को अपनी राय , दृष्टिकोण और भावनाओं को जाहिर करने का अवसर होता है ।
- समाचार उल्टा पिरामिड शैली में में लिखे जाते हैं, जबकि फ़ीचर लेखन की कोई सुनिश्चित शैली नहीं होती|
- फ़ीचर में समाचारों की तरह शब्दों की सीमा नहीं होती। आमतौर पर फ़ीचर, समाचार रिपोर्ट से बडे़ होते हैं। पत्र-पत्रिकाओं में प्राय: 250 से 2000 शब्दों तक के फ़ीचर छपते हैं ।