विशेष रिपोर्ट

सामान्य समाचारों से अलग वे विशेष समाचार जो गहरी छान-बीन, विश्लेषण और व्याख्या के आधार पर प्रकाशित किये जाते हैं, विशेष रिपोर्ट कहलाते हैं ।

 विशेष रिपोर्ट के प्रकार:

(1) खोजी रिपोर्ट : इसमें अनुपल्ब्ध तथ्यों को गहरी छान-बीन  कर सार्वजनिक किया जाता है।

(2) इन्डेप्थ रिपोर्ट:  सार्वजानिक रूप से प्राप्त तथ्यों की गहरी छान-बीन कर उसके महत्त्वपूर्ण पक्षों को पाठकों के सामने लाया जाता है ।

(3) विश्लेषणात्मक रिपोर्ट : इसमें किसी घटना या समस्या का विवरण सूक्ष्मता के साथ विस्तार से दिया जाता है । रिपोर्ट अधिक विस्तृत होने पर कई दिनों तक किस्तों में प्रकाशित की जाती है ।

(4) विवरणात्मक रिपोर्ट : इसमें किसी घटना या समस्या को  विस्तार एवं बारीकी के साथ प्रस्तुत किया जाता है।

 (5) विचारपरक लेखन : समाचार-पत्रों में समाचार एवं फ़ीचर के अतिरिक्त संपादकीय, लेख, पत्र, टिप्पणी, वरिष्ठ पत्रकारों व विशेषज्ञों के स्तम्भ छपते हैं । ये सभी विचारपरक लेखन के अन्तर्गत आते हैं ।

स्तम्भ  लेखन:

  • स्तम्भ लेखन एक प्रकार का विचारात्मक लेखन है । कुछ महत्त्वपूर्ण लेखक अपने खास वैचारिक रुझान एवं लेखन शैली   के लिए जाने जाते हैं ।
  • ऐसे लेखकों की लोकप्रियता को देखकर समाचरपत्र उन्हें अपने पत्र में नियमित स्तम्भ – लेखन की जिम्मेदारी प्रदान करते हैं ।
  • इस प्रकार किसी समाचार-पत्र  में किसी ऐसे लेखक द्वारा किया गया विशिष्ट एवम नियमित लेखन जो अपनी विशिष्ट शैली एवम वैचारिक रुझान के कारण समाज में ख्याति प्राप्त हो, स्तम्भ लेखन कहा जाता है ।

संपादक के नाम पत्र :

समाचार पत्रों में  संपादकीय पृष्ठ पर तथा पत्रिकाओं की शुरुआत में संपादक के नाम आए पत्र प्रकाशित किए जाते हैं । यह प्रत्येक समाचारपत्र का नियमित स्तम्भ होता है । इसके माध्यम से समाचार-पत्र अपने पाठकों को जनसमस्याओं तथा मुद्दों पर अपने विचार एवम  राय व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है ।

साक्षात्कार/इंटरव्यू:

 किसी पत्रकार के द्वारा अपने समाचारपत्र में प्रकाशित करने के लिए, किसी व्यक्ति विशेष से उसके विषय में अथवा किसी विषय या मुद्दे पर किया गया प्रश्नोत्तरात्मक संवाद  साक्षात्कार कहलाता है ।

विशेष लेखन: स्वरूप और प्रकार

विशेष लेखन किसी खास विषय पर  सामान्य लेखन से हट कर किया गया लेखन है । जिसमें  राजनीतिक, आर्थिक, अपराध, खेल, फ़िल्म,कृषि, कानून विज्ञान और अन्य किसी भी महत्त्वपूर्ण विषय से संबंधित विस्तृत सूचनाएँ प्रदान की जाती हैं । जैसे – कश्मीर पर दैनिक हिंदुस्तान और नवभारत में छपी अंबरीश की रिपोर्ट , नंद कौशिक का जनसत्ता में प्रकाशित विशेष लेख ‘संगीत में वसंत’ 

डेस्क :

समाचारपत्र, पत्रिकाओं , टीवी और रेडियो चैनलों में अलग-अलग विषयों पर विशेष लेखन के लिए निर्धारित  स्थल को डेस्क कहते हैं। और उस विशेष डेस्क पर काम करने वाले पत्रकारों का भी अलग समूह होता है । यथा, व्यापार तथा  कारोबार के लिए अलग तथा खेल की  खबरों के लिए अलग डेस्क निर्धारित होता है ।

बीट :

 विभिन्न विषयों से जुडे़ समाचारों के लिए संवाददाताओं के बीच काम का विभाजन आम तौर पर उनकी दिलचस्पी और ज्ञान को ध्यान में रख कर किया जाता है। मीडिया की भाषा में इसे बीट कहते हैं ।

बीट रिपोर्टिंग तथा विशेषीकृत रिपोर्टिंग में अन्तर:

बीट रिपोर्टिंगविशेषीकृत रिपोर्टिंग
बीट रिपोर्टिंग के लिए  संवाददाता में उस क्षेत्र के बारे में  जानकारी व दिलचस्पी का होना पर्याप्त है, साथ ही उसे  आम तौर पर अपनी बीट से जुडी़ सामान्य खबरें ही लिखनी होती हैं ।किन्तु विशेषीकृत रिपोर्टिंग  में सामान्य समाचारों से आगे बढ़कर संबंधित विशेष क्षेत्र या विषय से जुडी़ घटनाओं, समस्याओं और मुद्दों  का बारीकी से विश्लेषण कर प्रस्तुतीकरण किया जाता है ।
बीट कवर करने वाले रिपोर्टर को संवाददाता कहते हैं |विशेषीकृत रिपोर्टिंग करने वाले रिपोर्टर को विशेष संवाददाता कहा जाता है।

विशेष लेखन की भाषा-शैली:

  • विशेष लेखन की भाषा-शैली सामान्य लेखन से अलग होती है। इसमें संवाददाता को संबंधित विषय की तकनीकी शब्दावली का ज्ञान होना आवश्यक होता है, साथ ही यह भी आवश्यक होता है कि वह पाठकों को उस शब्दावली से परिचित कराए जिससे पाठक रिपोर्ट को समझ सकें।
  • विशेष लेखन की कोई निश्चित शैली नहीं होती

विशेष लेखन के क्षेत्र : विशेष लेखन के अनेक क्षेत्र होते हैं, यथा- अर्थ-व्यापार, खेल, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, कृषि, विदेश, रक्षा, पर्यावरण शिक्षा, स्वास्थ्य, फ़िल्म-मनोरंजन, अपराध, कानून व सामाजिक मुद्दे आदि ।

                 स्मरणीय  महत्त्वपूर्ण बिंदु :-

  1. सीधे प्रसारण को लाइव कहते हैं |
  2. हिंदी का पहला समाचार-पत्र उद्दंत-मार्तंड ( कलकत्ता) को माना जाता है |
  3. समाचारों को कवर करने की अंतिम समय सीमा(सामान्यत:  रात 12बजे तक) को डेड-लाइन कहते हैं |
  4. समाचार दिखाते समय फोन पर घटना-स्थल की जानकारी लेना फोन-इन कहलाता है |
  5. सनसनीखेज समाचार या ख़बरों को बढा-चढ़ा कर बताना पीत पत्रकारिता कहलाता है |
  6.  समाचार-पत्र, पत्र-पत्रिकाएँ,  पुस्तकें आदि प्रिंट मीडिया कहलाता है |
  7.  भारत की पहली इंटर-नेट समाचार साइट रीडिफ़ है |
  8. उल्टा-पिरामिड समाचार शैली का अर्थ है – पहले अति महत्वपूर्ण तथा बाद में महत्वपूर्ण समाचार प्रस्तुत करना | इसमें इंट्रो, बॉडी तथा समापन का क्रम रहता है|
  9. पत्रकारों की रुचि अनुसार कार्य विभाजन बीट कहलाता है | लेखन और विशेष रिपोर्टिंग का विशेष क्षेत्र बीट कहलाता है |
  10. समाचार –पत्र, पत्रिकाओं, टी. वी., रेडियो चैनलों से अलग-अलग विषयों पर विशेष लेखन के लिए निर्धारित स्थल को डेस्क कहते हैं |
  11. संचार-सूचनाओं,विचारों और भावनाओं को लिखित ,मौख़िक  या दृश्य-श्रव्य माध्यमों के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाना  संचार कहलाता है |
  12. प्रिंट माध्यम -छपाई वाले संचार माध्यम  प्रिंट माध्यम कहलाते हैं |
  13. हिंदी के दो दैनिक समाचार पत्रों के नाम–दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर |
  14. आल इंडिया रेडियो की स्थापना -1936 ईस्वी में|
  15. संपादन -किसी लिखित सामग्री को  त्रुटिविहीन करके उसे पढने योग्य बनाना |
  16. आधुनिक छापाखाने का आविष्कार-जर्मनी के गुटेनबर्ग ने सन्  1440 में किया।
  17.  भारत में पहला छापाखाना-सन 1556 में गोवा में खुला, इसे ईसाई मिशनरियों ने  धर्म-प्रचार की पुस्तकें छापने के लिए खोला था
  18.  मुद्रित माध्यम की विशेषताएँ-i. छपे हुए शब्दों में स्थायित्व होता है, इन्हें सुविधानुसार किसी भी प्रकार से पढ़ा जा  सकता है।

          ii. यह माध्यम लिखित भाषा का विस्तार है।

          iii.यह चिंतन, विचार विश्लेषण का माध्यम है ।

  1. आल इंडिया रेडियो की विधिवत स्थापना – सन 1936 में 
  2.  उल्टा पिरामिड शैली – जिसमें तथ्यों को महत्त्व के क्रम से  प्रस्तुत किया जाता है, सर्वप्रथम सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण तथ्य को तथा उसके उपरांत महत्त्व की दृष्टि से घटते  क्रम में तथ्यों  को रखा जाता है उसे उल्टा पिरामिड शैली कहते हैं । उल्टापिरामिड शैली में समाचार को तीन भागों में बाँटा जाता है -इंट्रो, बॉडी और समापन।
  3.  टी०वी० खबरों के विभिन्न चरण- दूरदर्शन मे कोई भी सूचना निम्न चरणों या सोपानों को पार कर दर्शकों तक पहुँचती है-

फ़्लैश या ब्रेकिंग न्यूज  :- समाचार को कम से कम शब्दों में तत्काल दर्शकों तक पहुँचाना

ड्राई एंकर :- एंकर द्वारा शब्दों में खबर के विषय में बताया जाता है

फोन इन :- एंकर रिपोर्टर से फोन पर बात कर दर्शकों तक सूचनाएँ पहुँचाता है |

एंकर विजुअल :- समाचार के साथ –साथ संबन्धित दृश्यों को दिखाया जाना |

एंकर बाइट :- एंकर का प्रत्यक्षदर्शी या संबन्धित व्यक्ति के कथन या बातचीत द्वारा  प्रामाणिक खबर प्रस्तुत करना |

लाइव :-   घटनास्थल से खबर का सीधा प्रसारण |

एंकर पैकेज :- इसमें एंकर द्वारा प्रस्तुत सूचनाएँ , संबन्धित घटना के दृश्य ,बाइट ,ग्राफिक्स आदि द्वारा व्यवस्थित ढंग से दिखाई जाती है |

  • पत्रकार तीन प्रकार के होते हैं-
  • पूर्ण कालिक – किसी समाचार संगठन में काम करने वाले नियमित वेतनभोगी कर्मचारी पूर्णकालिक पत्रकार कहलाते है |
  • अंशकालिक (स्ट्रिंगर)- किसी समाचार संगठन के लिए एक निश्चित मानदेय पर काम करने वाले पत्रकार अंशकालिक पत्रकार कहलाते हैं |
  • फ़्रीलांसर या स्वतंत्र पत्रकार- ऐसा पत्रकार जो अलग –अलग समाचार पत्रों के लिए भुगतान के आधार पर लिखते हैं , उन्हें फ्रीलांसर पत्रकार कहते हैं
  • पत्रकारीय लेखन तथा साहित्यिक सृजनात्मक लेखन में क्या अंतर – पत्रकारीय  लेखन का प्रमुख उद्देश्य सूचना प्रदान करना होता है,  इसमें तथ्यों की प्रधानता होती है जबकि साहित्यिक सृजनात्मक लेखन भाव ,कल्पना एवं सौंदर्य-प्रधान होता है |
  •  समाचार – समाचार किसी भी ऐसी ताजा घटना, विचार या समस्या की रिपोर्ट है,जिसमें अधिक से अधिक लोगों की  रुचि हो और जिसका अधिक से अधिक लोगों पर प्रभाव पड़ता हो ।

Published by LP CHAUDHARI

• व्यवसाय- जवाहर नवोदय विद्यालय पदमी (मंडला) में प्रशिक्षित स्नातक हिंदी अध्यापक(1997-2000) तथा वर्तमान में केंद्रीय विद्यालय संगठन में स्नातकोत्तर हिंदी अध्यापक के रूप में अध्यापन कार्य। * शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार से संबंधित संभाग स्तरीय कई कार्यशालाओं और बारह से अधिक राष्ट्र स्तरीय विभिन्न शिक्षक - प्रशिक्षण पाठ्यचर्याओं में संसाधक (स्रोत- व्यक्ति) के रूप कार्य। * राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु आयोजित गोष्ठियों और कार्यशालाओं में व्याख्यान । • साक्षरता और जन-जागृति अभियान- ‘अक्षर सैनिक’ के रूप में प्रौढों को साक्षर करने संबंधी कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता । नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त रखने हेतु 'राष्ट्रीय नदी संरक्षण - जन-जागृति कार्यक्रम' में संयोजक के रूप रचनात्मक भागीदारी हेतु नगरपालिका परिषद होशंगाबाद द्वारा प्रशस्ति-पत्र। • साहित्य-सर्जना – विभिन्न पत्रिकाओं जैसे- ‘प्रबोधिनी’, ‘प्रतिका’ आदि में रचनाओं का प्रकाशन । • सम्पादन – ‘प्रतिबिम्ब’, ‘प्रत्यूषा’ का सम्पादन । • सम्मान – * केंद्रीय विद्यालय संगठन –‘राष्ट्रीय प्रोत्साहन पुरस्कार’ -2015 * केंद्रीय विद्यालय संगठन –‘संभागीय प्रोत्साहन पुरस्कार’ -2014 * राष्ट्रीय स्तर पर – ‘चाणक्य सम्मान’ - 2014 (विपिन जोशी स्मारक समिति, इटारसी द्वारा) * वर्ष 2012 और 2013 में लगातार दो बार प्रतिभूति कागज कारखाना होशंगाबाद द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में ‘आदर्श कर्मचारी’ का सम्मान। * नर्मदापुर युवा मंडल द्वारा ‘प्रेरक सम्मान’ ।

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